अगले ढाई साल दिल्ली का हाल बेहाल !

दिल्ली में उपचुनाव के नतीजे बीजेपी के हक में जाते दिख रहे हैं। वहीं, लोगों का आम आदमी पार्टी के खिलाफ गुस्सा फूटकर निकला है। दिल्ली के राजौरी गार्डन से मनजिंदर सिंह सिरसा ने जीत हासिल की है।

राजौरी गार्डन सीट पर हुए उपचुनाव के नतीजों में आम आदमी पार्टी उम्मीदवार हरजीत सिंह की जमानत जब्त हो गई है। आप उम्मीदवार को महज 10243 वोट मिले हैं। पार्टी के खराब प्रदर्शन पर उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया ने कहा कि लोगों में जरनैल सिंह के इस्तीफे को लेकर नाराजगी थी, लेकिन राजौरी गार्डन के नतीजों को पूरी दिल्ली के नतीजे न समझा जाए। बता दें कि सीट से बीजेपी के मनजिंदर सिंह सिरसा ने 14 हजार वोटों से जीत दर्ज की है।

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इन परिणामों के बाद बीजेपी के कार्यकर्ता और नेताओं में खासा उत्साह देखने को मिल रहा है और वो इस उपचुनाव में मिली जीत को 23 अप्रैल को होने वाले एमसीडी चुनावों से जोड़ कर देख रहे हैं। बीजेपी के कार्यकर्ताओं का कहना है कि आने वाली 23 अप्रैल को बीजेपी एमसीडी में फिर से अपना झंडा बुलंद करेगी।

वहीं, उपमुख्यमंत्री ने राजौरी गार्डन सीट पर पार्टी की हार के बाद भी आने वाले नगर निगम चुनावों में पार्टी की जीत का दम भरा है। उन्होंने कहा, ”राजौरी गार्डन सीट के नतीजों का असर एमसीडी चुनाव पर नहीं पड़ेगा। हमने यहां के लोगों को समझाने की कोशिश की, लेकिन उन्होंने किसी और पार्टी को चुना। हम इलाके की भलाई के लिए आगे भी काम करते रहेंगे।”

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हालांकि उपमुख्यमंत्री ये मानते हैं कि इस हार का आम आदमी पार्टी पर कोई असर नहीं पड़ेगा लेकिन, असल हकीकत इससे अलग है। दिल्ली उपचुनाव वेशक बहुत बड़े चुनाव ना हो लेकिन, ये एमसीडी चुनावों से पहले की वो ‘हार’ की दस्तक है जिसे केजरीवाल सरकार को ध्यान से सुन लेना चाहिए। नहीं, तो 23 अप्रैल भी अब ज्यादा दूर नहीं है। और दिल्ली के लोगों की राय माने तो वेशक आने वाले दिन केजरीवाल सरकार के लिए खास दिक्कत के हो सकते हैं।

इसके कई कारण हैं। जिसमें प्रमुख कारण इस प्रकार हैं।

  1. दिल्ली के लोगों को आम आदमी पार्टी के रूप में ऐसी सरकार मिली। जिसके कामकाज के तरीके पर पहले दिन से ही सवाल उठऩे शुरू हो गए।
  2. केजरीवाल सरकार ने प्रचार प्रसार पर ज्यादा और काम पर कम तवज्जों दी। जो लोगों को रास नहीं आ रहा है।
  3. शुंगलू रिपोर्ट के बाद ज्यादातर लोगों का नजरियां केजरीवाल सरकार के खिलाफ हो गया है।
  4. पंजाब में करारी हार भी आम आदमी पार्टी की कार्य शैली पर सवालियां निशान लगा रही है।
  5. केजरीवाल सरकार पर आए दिन लगने वाले भ्रष्टाचार, अनैतिक कार्यशैली, सैक्स स्कैंडल आम आदमी पार्टी की फजीहत करने में कामयाब रहे हैं।

और इससे भी ज्यादा दिल्ली के लोगों के बीच दिल्ली के सीएम की छवि एक समझदार, ईमानदार, कर्मठ और जुझारू सीएम की जगह एक ऐसे सीएम की बनी है जिसके पास दिल्ली की सत्ता है और फिर भी उसे ये शिकायत है कि उसके हाथ खाली है। ऐसे में दिल्ली में हुए उपचुनाव इस बात की तस्दीक कर रहे हैं कि दिल्ली उपचुनाव में आम आदमी पार्टी को मिली करारी शिकस्त को केजरीवाल सरकार के कामकाज पर जनता की राय मानते हैं?

गौरतलब है कि दिल्ली के सीएम अरविंद केजरीवाल पिछले दिनों पांच राज्यों के नतीजों के बाद ईवीएम पर सवाल खड़े कर रहे थे, ऐसे में उपचुनाव का नतीजा उनके लिए बड़ी चुनौती की तरह सामने आया है।

वहीं, इस करारी शिकस्त के बाद, अगर हार का सिलसिला जारी रहा तो दिल्ली में 23 अप्रैल को होने वाले एमसीडी चुनाव में भी केजरीवाल शिकस्त खा जाएंगे। उसके बाद दिल्ली में केजरीवाल सरकार के और ढाई साल किस तरह के होंगे।

  1. क्या केजरीवाल एमसीडी चुनावों में मिली हार के बाद दिल्ली विधानसभा के चुनावों की तैयारी में जुट जाएंगे?
  2. क्या केजरीवाल दिल्ली में और अगले ढाई साल इसी तरह से राजनीति करेंगे जैसी कर रहे हैं?
  3. क्या केजरीवाल दिल्ली में मिली हार के बाद आत्ममंथन करेंगे?
  4. क्या केजरीवाल दिल्ली के लिए काम भी करेंगे या यूं ही आरोप प्रत्यारोप की राजनीति करते रहेंगे?

अगर केजरीवाल इन चारों सवालों में से एक पर ही अमल करते हैं तो दिल्ली के अगले ढाई साल बेहाल होंगे। क्योंकि इसके बाद केजरीवाल ना तो केन्द्र पर ही ज्यादा दवाब बना पाएंगे और ना ही दिल्ली में ज्यादा काम ही करवा पाएंगे। वहीं, दिल्ली के लोगों को केन्द्र सरकार और दिल्ली सरकार की गुथमगुत्था अलग देखने को मिलेगी। जिससे दिल्ली एमसीडी में जैसा आज करप्शन है वो बना रहेगा। साफ सफाई होगी नहीं, नालियों और सीवर के काम इसी तरह से अटके रहेंगे और दिल्ली की सड़कों पर कूड़े करकट के ढेर लगे रहेंगे।

वहीं दूसरी ओर केजरीवार इसपर बयानवाजी कर अपनी ड्यूटी पूरी करते रहेंगे और दिल्ल के लोगों के हिस्से में आएंगे दिल्ली के ढाई साल ‘बेहाल’

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Ravinder Kumar

Senior Special Correspondent

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